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तेजस Mk‑1A फाइटर जेट का नया स्क्वॉड्रन जल्द बनेगा – साल‑अंत तक 12 अतिरिक्त इंजन की डिलीवरी
तेजस Mk‑1A का नया स्क्वॉड्रन जल्द तैयार
हिंदुस्तान के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस Mk‑1A का अगला स्क्वॉड्रन इस साल के अंत तक तैयार होने की संभावना है। भारत सरकार ने हाल ही में इस बात की पुष्टि की कि 12 अतिरिक्त इंजन इस वर्ष के भीतर डिलीवर किए जाएंगे, जिससे तेजस‑Mk‑1A की ऑपरेशनल क्षमता में उल्लेखनीय इज़ाफ़ा होगा।
मुख्य बिंदु:
- स्क्वॉड्रन आकार: शुरुआती 12‑से‑15 विमानों का समूह, जिसमें दो अतिरिक्त फाइटर जेट शामिल हैं।
- इंजन डिलीवरी: HAL‑सहयोगी GE‑F414 इंजन की 12 यूनिट्स, जो 2024 के अंत तक एयरफोर्स तक पहुंचेंगी।
- ऑपरेशनल बेस: एयरफोर्स स्टेशन 2, बेंगलुरु में स्थित ‘हिंडोस्तानी एयरोनॉटिकल डिफेन्स एरिया’ (HADA) को प्रमुख स्थल बनाया गया है।
"तेजस‑Mk‑1A हमारे स्वदेशी क्षमताओं का प्रतीक है, और अतिरिक्त इंजन की उपलब्धता हमें निरंतर प्रशिक्षण और तैनाती के लिए आत्मविश्वास देती है।" – रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह
GE F414 engine production line India
इंजन डिलीवरी और तकनीकी प्रगति
इंजन की डिलीवरी का मुख्य कारण हेलिकॉप्टर एंजिन्स लिमिटेड (HAL) और GE Aviation के बीच विस्तारित सहयोग समझौता है। इस समझौते के तहत:
- स्लिपस्ट्रीम प्रोडक्शन: GE‑F414 इंजन की उत्पादन लाइन को भारत में स्थापित किया जा रहा है, जिससे लॉजिस्टिक लीड‑टाइम घटेगा।
- इंडियन सप्लाई चेन: स्थानीय घटकों का उपयोग बढ़ाने के लिए 30% तक सामग्री भारत में निर्मित होगी।
- डिज़ाइन अपग्रेड: Mk‑1A के लिए नवीनतम एरोडायनामिक पैकेज और डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम (DFCS) को एकीकृत किया गया है, जिससे रेंज 1,200 किमी और फ्यूल इफिशिएंसी में 15% सुधार हुआ है।
तकनीकी झलकियाँ:
- डिजिटल थ्रॉटल कंट्रोल – पायलट को अधिक सटीक थ्रॉटल मैनेजमेंट की सुविधा।
- इंटीग्रेटेड एलेर्ट सिस्टम – रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट (EW) के साथ सहज समन्वय।
- वेट‑ड्रॉप काबिलियत – 5,000 किलोग्राम तक के बम्पर वेट‑ड्रॉप को समर्थन।
रणनीतिक प्रभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा
तेजस Mk‑1A का स्क्वॉड्रन बनना सिर्फ एक तकनीकी मील का पत्थर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण है।
- क्षेत्रीय संतुलन: तेजस‑Mk‑1A, जो 5‑generation फाइटर जेट के विकल्प के रूप में विकसित हो रहा है, भारत को दक्षिण‑एशिया में वायवीय शक्ति का संतुलन स्थापित करने में मदद करेगा।
- स्वदेशी आत्मनिर्भरता: अधिक इंजन भारत में निर्मित होने से विदेशी निर्भरता घटेगी, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान कम होगा।
- सैन्य अभ्यास: नई स्क्वॉड्रन के साथ भारतीय वायु सेना (IAF) को संयुक्त अभ्यासों में भाग लेने, कक्षा‑सीमा (interoperability) बढ़ाने और तेजस‑Mk‑1A को वास्तविक युद्ध परिदृश्य में परीक्षण करने का अवसर मिलेगा।
भविष्य की राह – तेजस Mk‑1A का आगे का विकास
साल‑अंत तक 12 इंजन की डिलीवरी के बाद, अगले चरण में Mk‑1A के लिए 30‑से‑40 अतिरिक्त विमान की योजना है। इस विकास को दो मुख्य स्तंभों पर आधारित किया गया है:
- उन्नत एयर‑टू‑एयर क्षमताएँ – नई रडार (EL/M-2052) और एयर‑टू‑एयर मिसाइल (AIM‑120) के इंटीग्रेशन से।
- मल्टी‑रोल ऑपरेशन – ग्राउंड एटैक, इलेक्ट्रॉनिक जॅमर, और ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलेंस, रेकॉनिसेंस) मिशन के लिए मॉड्यूलर पेलोड।
इन पहलों के साथ, तेजस‑Mk‑1A को 2026 तक पूर्णतः ऑपरेशनल बनाने की दिशा में IAF की प्रतिबद्धता स्पष्ट है। इस प्रक्रिया में हिंडोस्तानी एयरोस्पेस रिसर्च संस्थान (HAL), डिफेन्स रिसर्च एंड डेवेलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) और निजी उद्योग साझेदारों का सहयोग प्रमुख रहेगा।
की टेकि: तेजस‑Mk‑1A का स्क्वॉड्रन निर्माण, 12 अतिरिक्त इंजन की डिलीवरी, स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक, और राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित प्रभाव।
Original Reporting & Source: India Today Top Stories
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