Umang Sisodia • • 4 min read • 1 view

पितृ पक्ष की एकादशी कब है ? 6 या 7 अक्टूबर 2026 की सही तिथि और मुहूर्त

पितृ पक्ष की एकादशी कब है ? 6 या 7 अक्टूबर 2026 की सही तिथि और मुहूर्त

पितृ पक्ष की एकादशी — क्यों है यह इतना खास?

पितृ पक्ष, हिन्दू कैलेंडर में वह अवधि है जब पूर्वजों की आत्माओं को स्मरण किया जाता है। इस पावन दो‑हफ़्ते के अंत में एकादशी आती है, जिसे शरद‑एकादशी या इंदिरा‑एकादशी भी कहा जाता है। 2026 में यह एकादशी 6 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे से 7 अक्टूबर की सुबह 4:15 बजे तक चलती है – एक छोटा‑सा अंतराल, लेकिन मुहूर्त के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण।


एकादशी का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

  • एकादशी: प्रत्येक महीने के द्वादशवें दिन (चंद्रमा के दो चरण) को एकादशी कहा जाता है। यह दिन उपवास, प्रार्थना और पवित्र ग्रंथों का पाठ करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
  • पितृ पक्ष: शरद‑एकादशी विशेष रूप से पितरों को श्रद्धा अर्पित करने के लिये मान्य है। इस दिन पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है – जल, दान और पवित्र मंत्रों के साथ।
  • ज्योतिषीय पहलू: इस वर्ष शरद‑एकादशी पर अश्विनी नक्षत्र और विष्णु योग है, जो पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करने में सहायक माना जाता है।

"एकादशी का उपवास और श्राद्ध दोनों ही शारीरिक व आध्यात्मिक शुद्धि लाते हैं, जिससे परिवार में सौहार्द और स्वास्थ्य में सुधार होता है।" – वेदांत विशेषज्ञ, डॉ. अंशु शर्मा


6 या 7 अक्टूबर — सही तिथि और मुहूर्त

तिथि चंद्रमा की स्थिति प्रमुख मुहूर्त
6 अक्टूबर 2026 शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि शुक्रम (सुबह 6 से 7 बजे) – शुभ आरम्भ
7 अक्टूबर 2026 शुक्ल पक्ष की 12वीं तिथि (एकादशी) अभिजित (शाम 6 से 7 बजे) – श्राद्ध के लिये उत्तम

मुख्य बात: श्राद्ध का मुख्य अनुष्ठान अभिजित मुहूर्त (शाम 6 से 7 बजे) में किया जाना चाहिए, जो 7 अक्टूबर को आता है। 6 अक्टूबर को केवल प्रारम्भिक तैयारी, पवित्र जल का स्नान और घर की सफ़ाई की जाती है।


श्राद्ध कैसे करें – चरण‑दर‑चरण मार्गदर्शिका

  1. सफाई एवं सजावट – घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और श्मशान को साफ‑सुथरा रखें। फूल, दीया और पवित्र धूप रखें।
  2. पवित्र जल का स्नान – सुबह के समय गंगाजल या पवित्र नदी का जल लेकर सभी सदस्य स्नान करें।
  3. आहार का चयन – उपवास में साबूदाना, कुटु और फलों का सेवन करें। मीठी वस्तुएँ जैसे खीर और सेंधा भी अनुकूल हैं।
  4. पुत्र‑पुत्री द्वारा अर्पण – पितरों को सम्मानित करने हेतु तिल, नारियल, कुंदे और साबूदाना का दान करें।
  5. मुख्य अनुष्ठान – अभिजित मुहूर्त – 7 अक्टूबर की शाम 6 से 7 बजे के बीच, पितरों के नाम लेकर त्रिपदा मंत्र का उच्चारण करें, फिर जल, दान और पिंड अर्पित करें।
  6. परिचारिका एवं दान – अनुष्ठान के बाद, जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र वितरित करें – यह श्राद्ध का एक अभिन्न भाग है।

भविष्य की दृष्टि – क्यों रहेंगे लोग इस एकादशी को याद?

  • सामाजिक पुनरुत्थान: महामारी के बाद परिवार‑केन्द्रित समारोहों में वृद्धि हुई है; पितृ पक्ष की एकादशी इस पुनःसंभाल का प्रतीक बन रही है।
  • डिजिटल पावनता: कई पंडित ऑनलाइन श्राद्ध‑स्ट्रीम सेवाएँ दे रहे हैं, जिससे दूर‑दराज़ रिश्तेदार भी भाग ले सकते हैं।
  • पर्यावरण‑सचेत अनुष्ठान: आजकल इको‑श्राद्ध को बढ़ावा दिया जा रहा है – प्लास्टिक‑मुक्त पिचकारियों, जैविक फूलों और स्थानीय सामग्रियों के प्रयोग से।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पितृ पक्ष की एकादशी 2026 में 7 अक्टूबर को अभिजित मुहूर्त (शाम 6‑7 बजे) पर मनाई जाए।
  • 6 अक्टूबर को तैयारी एवं प्रारम्भिक सफ़ाई का दिन माना जाता है।
  • श्राद्ध के लिये उपवास, पवित्र जल, तिल‑नारियल‑कुंदे और दान अनिवार्य हैं।
  • डिजिटल और इको‑फ़्रेंडली पहलें इस परम्परा को नई पीढ़ी तक पहुंचा रही हैं।

आप भी इस पवित्र एकादशी को अपने पूर्वजों को सम्मानित करने का अवसर बनाइए और इस शाश्वत परम्परा को आगे बढ़ाइए।


Original Reporting & Source: Google Trends (India)

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पितृ पक्ष की एकादशी कब है ? 6 या 7 अक्टूबर 2026 की सही तिथि और मुहूर्त

By Umang Sisodia • 4 min read • 1 view

पितृ पक्ष की एकादशी — क्यों है यह इतना खास?

पितृ पक्ष, हिन्दू कैलेंडर में वह अवधि है जब पूर्वजों की आत्माओं को स्मरण किया जाता है। इस पावन दो‑हफ़्ते के अंत में एकादशी आती है, जिसे शरद‑एकादशी या इंदिरा‑एकादशी भी कहा जाता है। 2026 में यह एकादशी 6 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे से 7 अक्टूबर की सुबह 4:15 बजे तक चलती है – एक छोटा‑सा अंतराल, लेकिन मुहूर्त के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण।


एकादशी का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

  • एकादशी: प्रत्येक महीने के द्वादशवें दिन (चंद्रमा के दो चरण) को एकादशी कहा जाता है। यह दिन उपवास, प्रार्थना और पवित्र ग्रंथों का पाठ करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
  • पितृ पक्ष: शरद‑एकादशी विशेष रूप से पितरों को श्रद्धा अर्पित करने के लिये मान्य है। इस दिन पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है – जल, दान और पवित्र मंत्रों के साथ।
  • ज्योतिषीय पहलू: इस वर्ष शरद‑एकादशी पर अश्विनी नक्षत्र और विष्णु योग है, जो पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करने में सहायक माना जाता है।

"एकादशी का उपवास और श्राद्ध दोनों ही शारीरिक व आध्यात्मिक शुद्धि लाते हैं, जिससे परिवार में सौहार्द और स्वास्थ्य में सुधार होता है।" – वेदांत विशेषज्ञ, डॉ. अंशु शर्मा


6 या 7 अक्टूबर — सही तिथि और मुहूर्त

तिथि चंद्रमा की स्थिति प्रमुख मुहूर्त
6 अक्टूबर 2026 शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि शुक्रम (सुबह 6 से 7 बजे) – शुभ आरम्भ
7 अक्टूबर 2026 शुक्ल पक्ष की 12वीं तिथि (एकादशी) अभिजित (शाम 6 से 7 बजे) – श्राद्ध के लिये उत्तम

मुख्य बात: श्राद्ध का मुख्य अनुष्ठान अभिजित मुहूर्त (शाम 6 से 7 बजे) में किया जाना चाहिए, जो 7 अक्टूबर को आता है। 6 अक्टूबर को केवल प्रारम्भिक तैयारी, पवित्र जल का स्नान और घर की सफ़ाई की जाती है।


श्राद्ध कैसे करें – चरण‑दर‑चरण मार्गदर्शिका

  1. सफाई एवं सजावट – घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और श्मशान को साफ‑सुथरा रखें। फूल, दीया और पवित्र धूप रखें।
  2. पवित्र जल का स्नान – सुबह के समय गंगाजल या पवित्र नदी का जल लेकर सभी सदस्य स्नान करें।
  3. आहार का चयन – उपवास में साबूदाना, कुटु और फलों का सेवन करें। मीठी वस्तुएँ जैसे खीर और सेंधा भी अनुकूल हैं।
  4. पुत्र‑पुत्री द्वारा अर्पण – पितरों को सम्मानित करने हेतु तिल, नारियल, कुंदे और साबूदाना का दान करें।
  5. मुख्य अनुष्ठान – अभिजित मुहूर्त – 7 अक्टूबर की शाम 6 से 7 बजे के बीच, पितरों के नाम लेकर त्रिपदा मंत्र का उच्चारण करें, फिर जल, दान और पिंड अर्पित करें।
  6. परिचारिका एवं दान – अनुष्ठान के बाद, जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र वितरित करें – यह श्राद्ध का एक अभिन्न भाग है।

भविष्य की दृष्टि – क्यों रहेंगे लोग इस एकादशी को याद?

  • सामाजिक पुनरुत्थान: महामारी के बाद परिवार‑केन्द्रित समारोहों में वृद्धि हुई है; पितृ पक्ष की एकादशी इस पुनःसंभाल का प्रतीक बन रही है।
  • डिजिटल पावनता: कई पंडित ऑनलाइन श्राद्ध‑स्ट्रीम सेवाएँ दे रहे हैं, जिससे दूर‑दराज़ रिश्तेदार भी भाग ले सकते हैं।
  • पर्यावरण‑सचेत अनुष्ठान: आजकल इको‑श्राद्ध को बढ़ावा दिया जा रहा है – प्लास्टिक‑मुक्त पिचकारियों, जैविक फूलों और स्थानीय सामग्रियों के प्रयोग से।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पितृ पक्ष की एकादशी 2026 में 7 अक्टूबर को अभिजित मुहूर्त (शाम 6‑7 बजे) पर मनाई जाए।
  • 6 अक्टूबर को तैयारी एवं प्रारम्भिक सफ़ाई का दिन माना जाता है।
  • श्राद्ध के लिये उपवास, पवित्र जल, तिल‑नारियल‑कुंदे और दान अनिवार्य हैं।
  • डिजिटल और इको‑फ़्रेंडली पहलें इस परम्परा को नई पीढ़ी तक पहुंचा रही हैं।

आप भी इस पवित्र एकादशी को अपने पूर्वजों को सम्मानित करने का अवसर बनाइए और इस शाश्वत परम्परा को आगे बढ़ाइए।


Original Reporting & Source: Google Trends (India)